अमेरिका की मानवाधिकार रिपोर्ट में मालेगाँव धमाके की जाँच पर सवाल

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मालेगाँव धमाका फिर चर्चा में

नई दिल्ली, अमेरिका ने प्रतिवर्ष अपने राज्य विभाग की ओर से जारी की जाने वाली मानवाधिकार रिपोर्ट में भारत को लेकर जो निष्कर्ष निकाले हैं वे अनेक मायने में भारत सरकार के लिए असहज स्थिति उत्पन्न  कर सकते हैं | इस रिपोर्ट में देश के अनेक भागों में हुई पुलिस मुठभेड़ की घटनाओं का जिक्र करते हुए “ गैर न्यायिक ह्त्या ” और “मनमाने तरीके से की जानी वाली गिरफ्तारियों का भी उल्लेख किया है” |

लेकिन इस रिपोर्ट में सबसे अधिक चौंकाने वाली बात वर्ष 2008 में हुए मालेगाँव धमाके में एन आई की जाँच पर उठाये गए सवाल पर है | रिपोर्ट में जांच एजेंसी एन आई ए पर लागाये जा रहे उन  आरोपों का हवाला दिया गया  है जिसके अनुसार मालेगाँव धमाके में शामिल हिंदुत्ववादी धारा के लोगों के प्रति जांच एजेंसी ढीला ढाला  रवैया अपना रही है |

 

इस रिपोर्ट में कहा गया है, “ 11 सितम्बर को सर्वोच्च न्यायालय  ने केंद्र सरकार , महाराष्ट्र सरकार और एन आई ए से उस जनहित याचिका के दायर होने के बाद सवाल किया था  जिसमें 2008 में मालेगाँव में हुए धमाकों की निष्पक्ष जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय से   हस्तक्षेप करने की मांग की गयी थी | इन मामलों में विशेष दंडाधिकारी रोहिणी सालियान   ने बाम्बे उच्च न्यायालय में एक शपथ पात्र दायर कर एन आई ए के उस अधिकारी का नाम बताया था जिसने उनसे इस मामले में दंड की प्रकिया को धीमा करने के लिए कहा था | रोहिणी सालियान ने अनेक प्रेस इंटरव्यू में एन आई ए के कुछ अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने उन पर इस बात के लिए दबाव डाला कि वे मालेगाँव मामले में पकडे गए हिन्दू अतिवादियों के पक्ष में कार्य करें” |

इसी के साथ अमेरिका के राज्य विभाग की इस रिपोर्ट में गैर न्यायिक हत्या और जबरन मनमानी गिरफ्तारी के भी अनेक मामलों का उल्लेख किया गया है जिनमें कि काफी चर्चा में रहा शोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ का भी जिक्र है |

इसके अतिरिक्त 7 अप्रिल को आंध्र प्रदेश स्पेशल टास्क फ़ोर्स द्वारा 20 संदिग्ध चन्दन तस्करों को मुठभेड़ में मार गिराने की घटना, उसी दिन नालगोंडा में जेल से हैदराबाद न्यायालय ले जाए जा रहे पांच आतंकवादियों को तेलंगाना पुलिस द्वारा मार गिराए जाने की घटना| इसी के साथ मनमानी गिरफ्तारी के मामले में 30 सितम्बर  2015 में मध्य प्रदेश में खंडवा अदालत द्वारा आतंकी संगठन सिमी के साथ जुड़े होने के आरोपों में गिरफ्तार हुए 14 लोगों को दोषमुक्त किये जाने का उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है |

मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में रिपोर्ट ने कश्मीर में अलगाववादी नेता और दुखतराने मिल्लत की प्रमुख आसिया अंदराबी की 2015 में हुई गिरफ्तारी का जिक्र किया गया है | “ पहली बार उन्हें 17 अगस्त 2015  को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर  पाकिस्तान का झंडा फहराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और फिर  रिहा कर 18 सितम्बर को फिर से गो ह्त्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया”   |

इस रिपोर्ट में 4 जून को नागा उग्रवादियों द्वारा भारतीय सेना के 20 लोगों की हत्या का जिक्र भी किया गया है रिपोर्ट के अनुसार इस उग्रवादी हमले के बाद सेना की स्पेशल फ़ोर्स ने बदले की कार्रवाई में 9 जून को बर्मा की सीमा में अनेक स्थानों पर कुल 30 से ७० उग्रवादियों को मौत के घाट उतार दिया |

अमेरिका की ओर से जारी की गयी मानवाधिकार रिपोर्ट में उन विषयों का जिक्र कर जो कि भारत में लम्बे समय से विवाद और चर्चा का कारण बने हैं निश्चित ही भारत सरकार और विशेष रूप से वर्तमान सरकार  के लिए असहज स्थिति उत्पन्न करते हैं| विशेष  रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व के अनेक मंचों पर आतंकवाद को किसी मजहब के चश्मे से देखने का विरोध करते आये हैं ऐसे में मालेगाँव धमाके की जांच में जांच एजेंसी पर सवाल उठाने से सरकार पर ऐसे सभी आतंकी मामलों की जांच में तेजी लाने और दोषियों को सजा दिलाने का दायित्व बढ़ जाता है  |