आई पी एल को लेकर नहीं दिख रहा जूनून

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आई पी एल को लेकर नहीं है जोश

हर बार की तरह वर्ष   2016 का आई पी एल सीजन भी काफी विज्ञापन , ताम झाम और बाजे गाजे के  बीच आरम्भ तो हो चुका है पर इस बार आश्चर्यजनक रूप से आई पी एल को लेकर जनता में  कोई ख़ास उत्साह या जूनून देखने को नहीं मिल रहा है|

जिस तरह पिछले कुछ सालों से लोग अपने घरों में टीवी सेट के सामने डट कर बैठ जाते थे और अपने पसंद की टीमें तय कर लेते थे उस तरह का उत्साह न तो लोगों के घरों में दिख रहा है और न ही रेस्टोरेंट और शोपिंग माल में |

आई पी एल मैचों में मैदान में भी दर्शक इस बार उस संख्या में नहीं जुट रहे हैं और इन सबसे आई पी एल ब्रांड को लेकर आस लगाए बड़ी कंपनियों को गहरी निराशा हो रही है क्योंकि टीवी पर कम दर्शकों का असर टीवी के विज्ञापन से लेकर बी सी सी आई तक पर पड़ रहा है|

आई पी एल को लेकर दर्शकों में आई उदासीनता के अनेक कारण हो सकते हैं |

पिछले कुछ महीनों में टी 20 के अंतरराष्ट्रीय मैचेज काफी अधिक संख्या में हो गए जिसमें कि एशिया कप, श्रीलंका के साथ सीरीज और फिर टी 20 विश्व कप | अधिक मैचों के चलते दर्शकों में टी 20 संस्करण को लेकर  थकावट और आलस्य आ गया है और विशेष रूप से विश्व कप में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन ने भी लोगों का उत्साह तोड़ दिया है|

इसके साथ ही पिछले कुछ वर्षों में आई पी एल को लेकर अनेक विवाद खड़े हो गए जिससे कि इस खेल की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग गया | इस वर्ष  आई पी एल के नए  सीजन के आरम्भ होने  से पहले  ही महाराष्ट्र में सूखे को लेकर अदालत तक मामले के चले जाने से भी लोगों का ध्यान सूखे की ओर चला गया |

इन सबसे परे एक और गूढ़ बात जो आई पी एल के प्रति जनता की अरुचि से पढी जा सकती है कि देश की जनता अपनी दिन प्रतिदिन की परेशानियों और आस पास के निराशाजनक वातावरण से बोझिल होकर चाहकर भी उल्लास और उत्साह का वातावरण नहीं बना पा रही है और देश का वातावरण , जीवन और सामाजिक, आर्थिक और  राजनीतिक विमर्श पूरी तरह निराशाजनक और बोझिल होता जा रहा  और यही तनाव और निरुत्साह आई पी एल के प्रति निराशा में झलक  रहा है |