इस्लामिक विश्व के नए नेता के रूप में उभर रहा है तुर्की

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इस्लाम का नया चेहरा तुर्की

इस्ताम्बुल , पिछली अनेक शताब्दियों से एक सेक्युलर और आधुनिक इस्लामिक देश के रूप में पश्चिमी देशों के अधिक निकट माना जाने वाला तुर्की धीरे धीरे अपनी पुरानी इस्लामिक पहचान को आगे करते हुए इस्लामिक दुनिया के देशों के मध्य एक मध्यस्थ की भूमिका निभाता हुआ पूरी दुनिया की रणनीतिक और भू राजनीतिक प्राथमिकताओं के सामने स्वयं को नए वैश्विक खिलाड़ी के रूप में प्रस्तुत कर रहा है |
इस्लामिक जगत के शक्तिशाली संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन ओ आई सी की बैठक की मेजबानी कर तुर्की ने अपनी इस नयी महत्वाकांक्षा और भूमिका का संकेत दे दिया है| तुर्की की राजधानी इस्ताम्बुल में आरम्भ हुई इस बैठक में आरंभिक भाषण देते हुए तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तईप एरडोगन ने सभी मुस्लिम देशों से सांप्रदायिक मतभेद भूलकर इस्लाम की संगठित शक्ति के रूप में कार्य करने का आह्वान किया और विशेष रूप से उन्होंने शिया और सुन्नी खेमे में बंटे इस्लामिक जगत को केवल इस्लामी पहचाना को मजबूत करने का आह्वान किया |
इसके साथ ही एरडोगन ने अनेक ऐसे विचार दिए जो विश्व राजनीति में इस्लामिक जगत के नेता और मध्यस्थ के रूप में स्वयं को स्थापित करने की उनकी कोशिश की ओर संकेत करता है |

एरडोगन ने संयुक्त राष्ट्र संघ के ढाँचे में बदलाव की आवश्यकता जताई ताकि मुस्लिम विश्व को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके | एरडोगन ने इस्लामिक स्टेट को उसके दूसरे नाम डैस से संबोधित किया और नाईजीरिया के क्रूर आतंकी संगठन बोको हरम सहित उसकी भी आलोचना की और इनपर शैतानी काम करने का आरोप लगाया |

तुर्की के राष्ट्रपति ने बैठक को बताया कि ओ आई सी ने उनके इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है कि तुर्की के इस्ताम्बुल में केन्द्रित एक बहुराष्ट्रीय पुलिस समन्वय केंद्र बनेगा जो कि इस्लामी देशों में उग्रवादियों से लड़ने में उनकी सहायता करेगा | साथ ही उन्होंने सभी मुस्लिम देशों में आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में परस्पर सहयोग के लिए अधिक सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता जताई| अपने संबोधन में उन्होंने फिलीस्तीन को अलग देश के रूप में दर्जा दिए जाने की मांग भी की |

तुर्की के राष्ट्रपति एरडोगन के इस संबोधन में विश्व राजनीति में इस्लामिक देशों के मध्यस्थ और नेता के रूप में स्वयं को स्थापित करने की उनकी मंशा साफ झलक रही थी |