कपिल शर्मा , अंगूरी भाभी विवाद के मायने

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प्रतिभा की सजा

पिछले एक वर्ष में टेलीविजन चैनल के दो मनोरंजक कलाकार और अपने अनूठेपन के कारण तेजी से  लोगों के मध्य लोकप्रियता प्राप्त करने वाले दोनों कलाकारों के साथ एक जैसी घटना का घटित होना कोई संयोग नहीं हो सकता |

पहले कलर्स चैनल पर बेहद लोकप्रिय “ कामेडी नाइट्स विद कपिल शर्मा” जिस गरिमाहीन ढंग से कपिल शर्मा और चैनल के मध्य विवाद के बीच बंद हुआ उसको लेकर कयास लगाए ही जा रहे थे कि अब एक और टेलीविजन चैनल एंड टीवी के सीरियल “ भाभी जी घर पर हैं” की अंगूरी भाभी का रोल करने वाली शिल्पा शिंदे को लेकर फिर वैसा ही विवाद यह सोचने पर विवश करता है कि ऐसा क्यों हो रहा है?

क्योंकि इसी से मिलती जुलती कहानी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की भी है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से लगातार उन्हें भी किसी न किसी बहाने निशाने पर लिया जा रहा है और इसके लिए सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है |

ये तीनों ही मामले एक ही ओर सकेंत करते हैं कि देश में एक  नए प्रकार का अंतर्संघर्ष  आरम्भ हो गया है और वह है एकाधिकार बनाम प्रतिभा का संघर्ष |

किसी भी स्तर पर यदि छोटे जगह से और परम्परागत कुलीन और यथास्थिति को चुनौती देता हुआ कोई भी  अपनी  प्रतिभा से आगे बढ़ जाता है तो आरम्भ में उसकी प्रतिभा से ब्रांड बनाने में सहयोग लिया जाता है और धीरे धीरे जब वह स्वयं एक ब्रांड बन जाता है तो परम्परागत कुलीन और यथास्थितिवादी शक्तियां उसे हटाकर उस स्थान पर उन लोगों को लाना चाहती हैं जिनके साथ वे अधिक सहज हैं|

यह एक प्रकार की मोनोपोली की मानसिकता है जो हर स्तर पर बढ़ रही है और कार्पोरेट क्षेत्र के लोगों के हर क्षेत्र में प्रवेश कर जाने के बाद यह पूरी तरह खेल का नियम बनता जा रहा है  धोनी, कपिल शर्मा या शिल्पा शिंदे इसके नवीनतम शिकार लोग हैं , इसके शिकार आगे चलकर वे लोग भी हो सकते हैं जो अभी ऐसे लोगों को अपना हमसफ़र मानते हैं|