कीर्ति आजाद पर फंसती भाजपा ?

0
485
Courtesy- Rediff.com

भारतीय राजनीति में जो रुझान आम तौर पर होता आया है उसे यदि आधार मानकर चला जाए जो कीर्ति आजाद के भाजपा से निलंबन के घटनाक्रम पर यही कहा जा सकता है कि इस मुद्दे पर अभी तक भाजपा फंसती ही नजर आ रही है क्योंकि राजग सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली पर डी डी सी ए में कथित भ्रष्टाचार के जिस  मुद्दे के सामने आने के बाद भाजपा ने बिहार के दरभंगा से अपने सांसद कीर्ति आजाद को पार्टी से निलंबित किया है और इसके लिए अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों का तर्क दिया है वह तर्क अधिकतर तकनीकी ही लगता है  क्योंकि कीर्ति आजाद ने क्रिकेट प्रशासन में कथित अनियमितिता का आरोप लगाया था और उन्होंने अपनी पार्टी के किसी नेता पर कोई आरोप नहीं लगाया था और ऐसा आरोप वे पिछले अनेक वर्षों से लगाते आ रहे थे तो फिर निलम्बन अभी क्यों ? निश्चित रूप से आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की ओर से पद रहे दबावों के असर के परिणाम के रूप में ही इसे देखा जा सकता है  , यह बात और है कि दोनों बातें आपस में इतनी मिली और गुंथी हुई हैं कि उन्हें अलग कर पाना कठिन है|

इसके बाद भी भाजपा खुद को इस प्रश्न से अलग नहीं कर सकती कि क्रिकेट प्रशासन और पार्टी के मामले अलग अलग क्यों नहीं हैं ?

कीर्ति आजाद को इस अवसर पर पार्टी से निलंबित कर भाजपा ने अपने विरोधियों को अधिक खुला अवसर दे दिया है कि वे न केवल कीर्ति आजाद के सहारे वित्त मंत्री पर और प्रहार करें वरन  न केवल कीर्ति आजाद को राजीव गांधी के वी पी सिंह की तरह प्रस्तुत कर आने वाले समय में भाजपा के भ्रष्टाचार पर उच्च स्तर का नैतिक मानदण्ड स्थापित करने के प्रयासों को पलीता लगाएं बल्कि नित नए आरोपों के द्वारा भाजपा सरकार की साख को जनता के मध्य वैसे ही बट्टा लगाएं जैसा कि भाजपा ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार  के समय में किया था |

इस बात के संकेत मिलने शुरू भी हो गए हैं जब कि आम आदमी पार्टी के नेताओं के विरुद्ध वित्त मंत्री अरुण जेटली के मानहानि के दावे के मामले में देश के मशहूर वकील राम जेठमलानी ने आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर से पैरवी करने की घोषणा कर दी है | साथ ही  भाजपा के कुछ नेताओं के भी कीर्ति आजाद के समर्थन में आने के संकेत ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि कीर्ति आजाद भाजपा में और बाहर उतने अलग थलग नहीं पड़े हैं जितना कि उन पर कारवाई के दौरान सोचा गया होगा|

आने वाले दिनों में यह देखना रोचक होगा कि कीर्ति आजाद और भाजपा का यह टकराव क्या मोड़ लेता है पर इतना तो तय है कि देश की राजनीति पर इस विवाद का गंभीर प्रभाव होने वाला है क्योंकि भाजपा के रुख से लगाता है कि उसने अरुण जेटली का साथ देने का मन बना लिया है और ऐसे में उन  पर चौतरफा आरोपों की झडी लगने ही वाली है  जैसा कि हॉकी इंडिया पर पूर्व खेल मंत्री गिल के आरोपों से संकेत मिल रहे हैं |

वैसे भी भाजपा के पास अरुण जेटली का बचाव करने के अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं है क्योंकि वे पार्टी के अत्यंत वरिष्ठ नेता हैं पर कीर्ति आजाद को पार्टी से निलंबित करने के निर्णय से भाजपा को अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है और देश में एक बार फिर राजीव गांधी काल की राजनीति स्वयं को दुहराती नजर आ रही है देखना होगा कि क्या कीर्ति आजाद २०१५ के वी पी सिंह बन पाते हैं या नहीं ?