गोवा और मणिपुर का सन्दर्भ

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सुस्त और पस्त होती कांग्रेस

पिछले सप्ताह 11 मार्च को पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के आते आते कांग्रेस पंजाब सहित गोवा और मणिपुर को भी अपने खाते में मानकर चल रही थी और इसी बनावटी आत्मविश्वास का परिणाम था कि कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर देश की जनता को बधाई दे डाली कि तीन राज्यों में कांग्रेस की विजय देश को कांग्रेस मुक्त करने का दावा करने वालों के लिए जनता का जवाब है|

चुनाव परिणाम आने के कुछ ही घंटों में जिस प्रकार गोवा और मणिपुर में अपनी जीत का दावा करने वाली कांग्रेस सरकार बनाने के दौड़ से बाहर हो गयी वह एक रोचक विषय है जिस पर चर्चा और इससे मिलने वाले संकेतों पर गौर करना आवश्यक है|

गोवा और मणिपुर में कांग्रेस पहले नंबर की पार्टी रही फिर भी इन राज्यों के राज्यपाल ने इसे सरकार बनाने का अवसर नहीं दिया इसके तकनीकी पहलू हैं या नहीं और यह नैतिक है नहीं पर इससे भी बड़ा एक संकेत इस पूरे मामले में आया है वह है कि कांग्रेस अब नए दौर की नरेन्द्र मोदी की भाजपा से हर मामले में मुंह की खाती जा रही है| यह आश्चर्य का विषय है कि कांग्रेस इस कदर सुस्त और पस्त हो चुकी है कि उसने इन राज्यों में अपनी सरकार बनाने की प्रक्रिया आरम्भ करने की कोई जल्दी नहीं दिखाई या उसे यह कल्पना भी नहीं थी कि भाजपा उसके साथ वही खेल कर देगी जो अपने बुलंदी के दिनों में कांग्रेस दूसरों के साथ किया करती थी  | उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की असाधारण पराजय से सदमे में आयी कांग्रेस की मनोदशा का लाभ उठाकर भाजपा ने गणित अपने पक्ष में कर लिया | भाजपा ने गोवा और मणिपुर में जो तत्परता दिखाई है असल में वह सत्ता में जाने की जल्दी से अधिक कांग्रेस के मनोबल को और गिराने की रणनीति का हिस्सा अधिक लगता है|

पंजाब को छोड़कर सभी राज्यों में सरकार से बाहर हो जाने से अब कांग्रेस पूरी तरह हताश है और रणनीति के स्तर पर वह पूरी तरह  चेतनाशून्य हो चुकी है|

आज कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भले ही कह रहे हों कि भाजपा से उनकी लडाई विचारधारा की है पर असल में आज तक वे उस विचारधारा को रेखांकित नहीं कर पाए हैं जिसकी बात वे करते हैं  और आने वाले दिनों में कांग्रेस किसी रणनीति के साथ भाजपा को चुनौती दे पायेगी ऐसा नहीं दिखता |

अब देश की राजनीति का रोचक मोड़ है क्योंकि भाजपा के रवैये से लगता है कि वह कांग्रेस के स्पेस को भरना चाहती है और गोवा व मणिपुर में भाजपा ने पूरी तरह कान्ग्रेस का अनुकरण किया है और जिस प्रकार पांच राज्यों के चुनाव परिणाम सहित नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के लिए 1970 के दशक की इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया जा रहा है और गरीबों को एक अलग वोट बैंक के रूप में उसी तर्ज पर विकसित किया जा रहा है जैसा कि इंदिरा गांधी ने किया था तो इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि भाजपा २१वी शताब्दी की  कांग्रेस बनने की ओर अग्रसर है परन्तु क्या यह संक्रमण इतना सहज होगा?