गोविन्दाचार्य ने शुरू किया भारत गौरव अभियान |

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स्वदेशी राजनीति की एक और पहल

नई दिल्ली | देश के अति विशिष्ट चिंतकों में से एक और गांधीवादी सामाजवाद व दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन के सामन्जस्य से भारत की प्रकृति के अनुरूप राज्य व्यवस्था व अर्थ नीति के दर्शन के लिए पिछले अनेक वर्षों से कार्यरत के एन गोविन्दाचार्य ने अपने जीवन के 75वें वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही एक और पहल आरम्भ की है|

मावलंकर हाल में आयोजित इस  कार्यक्रम में वर्ष भर चलने वाले इस  देशव्यापी कार्यक्रम की रूपरेखा देश के विभिन्न भागों से आये वैकल्पिक व्यवस्था के आंदोलनरत कार्यकर्ताओं के समक्ष रखी गयी |

कार्यक्रम का आयोजन भाजपा के राज्यसभा सांसद और अनेक वर्षों से श्री गोविन्दाचार्य के सहयोगी के रूप में उनके स्वाभिमान आन्दोलन और भारत विकास संगम के साथ कार्य कर रहे वासवराज पाटिल और विमल कुमार सिंह द्वारा संचालित सनातन किष्किन्धा मिशन के सौजन्य से किया गया था |

इस कार्यक्रम में भाजपा के बडबोले नेता और राज्यसभा सांसद डा सुब्रमणियन स्वामी , राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा, प्रसिद्ध सम्पादक श्री हरिबंश भी उपस्थित थे  और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के निदेशक डा रामबहादुर राय ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की |

श्री गोविन्दाचार्य के 75वें वर्ष में प्रवेश करने को निमित्त बनाकर आयोजित किये गए इस कार्यक्रम में “ भारत गौरव अभियान” के नाम से एक अति महत्वाकांक्षी पहल की विस्तार से चर्चा उपस्थित लोगों के समक्ष वासवराज पाटिल ने की   जिसके अनुसार “ भारत गौरव अभियान” के माध्यम से अगले एक वर्ष में देश के प्रत्येक जिले में इस अभियान के माध्यम से उन लोगों और प्रकल्पों की पहचान की जायेगी जिन्होंने स्थानीय समाज के लिए अपने प्रयासों से अत्यंत रचनात्मक कार्य किये हैं पर उनके बारे में कोई नहीं जानता और ऐसे ही लोगों के व्यक्तिगत परिचय और उनके कार्य के परिचय के साथ एक सविस्तार डायरेक्ट्री अगले वर्ष श्री गोविन्दाचार्य के जन्मदिन पर ठीक इसी दिन प्रकाशित कर सामने लाई जायेगी|

इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी वक्ताओं ने एक स्वर से श्री गोविन्दाचार्य के सार्वजनिक जीवन में उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता और त्याग की प्रशंसा करते हुए देश के लिए एक ऐसी वैचारिक परिस्थिति के निर्माण के लिए उनके प्रयास पर उत्साह दिखाया कि जो देश की परम्परा को आगे बढ़ा सके|

कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री रामबहादुर राय ने “ भारत गौरव अभियान” के राजनीतिक संदर्भ की ओर संकेत करते हुए इस कार्यक्रम की तुलना फरवरी 1948 में महात्मा गांधी जी द्वारा  वर्धा में देश भर के गांधीवादियों को एकत्र करने के प्रयास से की जिसमें कि गांधी जी अपनी ह्त्या के बाद भले शामिल न हो सके पर यह कार्यक्रम आयोजित हुआ पर गांधी जी की इच्छा के अनुरूप देश की राज्य व्यवस्था चल नहीं पायी | श्री राय ने इच्छा जताई कि श्री गोविन्दाचार्य के “ भारत गौरव अभियान” से उस रुक गए अभियान को गति मिल सकेगी |

इस अवसर पर डा सुब्रह्मण्यन स्वामी ने भी गोविन्दाचार्य की प्रशंसा की और उन्हें डा राय सहित भाजपा के माध्यम से अपने कार्य को गति देने की अपील की जिसे डा राय ने बड़ी विनम्रता से  अस्वीकार कर दिया|

कार्यक्रम में स्वयं गोविन्दाचार्य ने सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद दिया और वक्ताओं के प्रति विनम्रता ज्ञापित की और प्रकृति केन्द्रित विकास की ओर मानव सभ्यता को ले जाने के अपने अभियान और इसी विचारधारा को अधिक लोगों तक ले जाने के अपने अभियान की रूपरेखा रखते हुए श्री गोविन्दाचार्य ने कहा कि आज से सौ वर्ष पहले मोतिहारी से ही महात्मा गांधी ने किसानों के अधिकारों के लिए सत्याग्रह आरम्भ किया था और आज सौ वर्ष बाद भी यदि देश में किसान आत्महत्या कर रहा है और उसे सुगर मिलमालिकों के शोषण का शिकार होना पड़ रहा है और उसे अपनी उपज का मूल्य नहीं मिल रहा है तो हमें सोचना होगा कि हम इन सौ वर्षों में कहाँ तक बढे हैं|

कार्यक्रम में स्वामी अवशेशानंद और कुसुमलता केडिया ने भी अपने विचार व्यक्त किये |