जीवन साथी से जबरन सेक्स बनेगा अपराध

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नारी स्वतंत्रता की ओर एक और कदम

नई दिल्ली, भारत सरकार ने पिछले कुछ सालों से देश में चल रही विवाह अंतर्गत दुष्कर्म की बहस को एक नयी दिशा देते हुए संकेत दिए हैं कि वह वैवाहिक संबंधों में भी पत्नी की सहमति के बिना जबरन सेक्स के लिए विवश करने को दुष्कर्म की परिभाषा में लाने पर विचार कर रही है |

महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इस सम्बन्ध में संकेत दिए कि “ मैरिटल रेप” को सरकार अपराध की श्रेणी में लाने पर विचार कर रही है| श्रीमती मेनका गांधी का यह ताजा  बयान उनके उस बयान के ठीक उलट है जो उन्होंने 16 मार्च को संसद में इस विषय पर दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि, “ मैरिटल रेप की धारण अन्तराष्ट्रीय स्तर पर है, लेकिन शिक्षा का स्तर, साक्षरता, गरीबी, धार्मिक सामाजिक बंधन, मान्यता व मूल्य, समाज का मानस, विवाह को पवित्र बंधन मानने जैसे  विभिन्न कारणों से यह  भारतीय संदर्भ में उपयुक्त नहीं है” | बाल विकास मंत्री के इस बयान के बाद काफी हंगामा हुआ था और अब इस विषय पर मंत्री की बदली हुई राय सरकार  के बदले रुख की ओर संकेत कर रही है|

भारत में इस विषय पर काफी समय से चर्चा हो रही है क्योंकि एक ओर तो परम्परा और  मूल्य का हवाला देकर विवाह को जन्मों का बंधन माना जाता है पर स्त्रियों के साथ घरेलू अत्याचार , हिंसा और उन्हें विवाह के बाद पुरुष की समाप्ति मानने की प्रव्रत्ति ही  आम है और आधुनिक युग में स्त्रियों को बराबर का सामाजिक, आर्थिक और मानवीय गरिमा का अधिकार मिलना चाहिए और इस दिशा में विवाह सम्बन्ध में भी जबरन सेक्स से पत्नी को बचाया जाना चाहिए क्योंकि यह स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा का प्रश्न है घरेलू नहीं |