जी एस टी से खफा आर एस एस के संगठन

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छोटे कारोबारियों पर बोझ न बन जाये जी एस टी

नई दिल्ली, एक ओर एनडीए सरकार ने पूरे तामझाम से नई टैक्स प्रणाली जी एस टी को अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने का फैसला किया है तो वहीं दूसरी और केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा के वैचारिक सहयोगी इससे आश्वस्त नजर नहीं आ रहे हैं |

टाइम्स आफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के घटक स्वदेशी जागरण मंच ने वर्तमान स्वरुप में जी एस टी पर सवाल खड़े किये हैं और सरकार से मांग की है कि जी एस टी में नए सिरे से संशोधन कर अनेक ऐसी वस्तुओं को  जी एस टी की श्रेणी से बाहर किया जाए जो कि देश में लघु उद्योग के व्यापार को प्रभावित करते हैं|

स्वदेशी जागरण मंच ने स्पष्ट किया है कि लघु उद्योग के साथ वे पूरी मजबूती से खड़े हैं और सरकार से  आह्वान किया है कि इनकी शिकायतों पर सरकार ध्यान दे और जी एस टी को नए सिरे से संतुलित रूप में सामने लाये ताकि पुरानी टैक्स प्रणाली से  नयी प्रणाली में आने में  लघु उद्योगों को कठिनाई न हो|

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक अश्वनी महाजन ने एक बयान जारी कर कहा “ हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि  देश के लिए लघु उद्योग अत्यंत महत्व के हैं और रोजगार प्रदान करने से लेकर उत्पादन और निर्यात में इनकी भूमिका काफी अहम है| यहाँ तक कि तमाम कठिनाइयों के बीच यही लघु उद्योग बाजार में चीन  के सामानों को कड़ी टक्कर दे रहा है| यदि इनकी कठिनाइयों को नजरअंदाज कर नयी टैक्स प्रणाली को लागू किया गया तो भारतीय बाजार चीन के सामानों से भर जायेंगे और हमारा व्यापार घाटा और बढ़ जाएगा” |

सरकार को जी एस टी की नयी कर प्रणाली में टैक्स दर निर्धारित करते समय इस बात का ध्यान रखना  चाहिए था कि लघु उद्योग की जद में आने वाली वस्तुओं की दर कम रहे ताकि इनके द्वारा दिए जाने वाले रोजगार पर असर न पड़े|

जी एस टी पर सवाल उठाने वाला राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का यह दूसरा घटक है इससे पहले कुछ दिनों पहले ही  विश्व हिन्दू परिषद ने भी अपनी केन्द्रीय बैठक में मंदिरों को जी एस टी के दायरे में लाने का विरोध किया था साथ ही पूजा सामग्रियों पर बढ़ाई गयी टैक्स की दर को भी सरकार से तत्काल  प्रभाव से वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया था |