ढाका में देशद्रोह के आरोप में संपादक गिरफ्तार

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बांग्लादेश में प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल

ढाका, बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शनिवार को एक पत्रिका के 81 वर्षीय सम्पादक को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किये जाने के साथ ही भारत के इस पड़ोसी देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर फिर प्रश्न खड़े हो गए हैं|
81 वर्षीय सम्पादक शफीक रहमान की पत्नी तालिया रहमान  के अनुसार सादे वेश में तीन पुलिस अधिकारी उनके घर में सुबह तड़के  आये और स्वयं को एक निजी टेलीविजन स्टेशन से बताया और घर में घुसते ही शफीक रहमान को उठा ले गए|
शफीक को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस से घोषणा की कि वे ब्रिटिश नागरिक हैं और वे पूर्व में विपक्ष की नेता और बांग्लादेश  की प्रधानमंत्री शेख हसीना की कट्टर प्रतिद्वंदी बेगम खालिदा जिया के भाषण भी लिखते रहे हैं |
बांग्लादेश पुलिस के प्रवक्ता मारूफ होसैन सोरदर  ने आरम्भ में समाचार एजेंसियों को बताया कि श्री रहमान को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है , बात में इसे सुधारते हुए कहा कि “ उन पर अपराध के लिए षडयंत्र रचने का आरोप है” | पुलिस अधिकारियों के अनुसार उन्हें इस बात के प्रमाण मिले हैं कि सम्पादक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के पुत्र साजिद जॉय ( जो कि मुख्य रूप से अमेरिका में रहते हैं को मारने के षड्यंत्र में भी  शामिल हैं)पुलिस प्रवक्ता के अनुसार सम्पादक ने 2013 में अमेरिका की यात्रा की और जॉय को मारने के षड्यंत्र में हिस्सा लिया |

रहमान तीसरे विपक्ष समर्थक सम्पादक हैं जिन्हें सरकार ने गिरफ्तार किया है और इनकी रिहाई की मांग मानवाधिकार समर्थक समूह करते आये हैं |

इससे पहले बांग्लादेश के  अग्रणी बंगाली और इंग्लिश  समाचार पत्रों के संपादकों पर  भी आपराधिक मामलों और दर्जनों मान हानि के साथ देशद्रोह  के आरोप हैं |
रहमान लम्बे समय तक भारी प्रसार संख्या वाले बंगाली दैनिक जय जय दिन के लम्बे समय तक सम्पादक रहे और वर्तमान में बंगाली मासिक पत्रिका के सम्पादक थे  | इससे पहले वे विपक्ष की नेता खालिदा जिया के भाषण भी लिखते रहे हैं|
हाल के महीनों में रहमान खालिदा जिया की पार्टी के विदेश विभाग के प्रमुख बने थे और विपक्ष समर्थक थिंक टैंक जी 9 के भी प्रमुख बन गए थे|
अभी पिछले सप्ताह ही ढाका  उच्च न्यायालय ने डेली स्टार समाचार पत्र के सम्पादक महफूज अनाम के विरुद्ध सरकार समर्थकों द्वारा किये गए मान हानि के मामलों को स्थगित कर दिया था|

शफीक रहमान के बांग्लादेश की विपक्षी नेता खालिदा जिया के साथ संपर्कों को देखते हुए और सरकार की हाँ में हाँ न मिलाने वाले संपादकों के उत्पीडन को देखते हुए  उन पर लगे आरोपों को राजनीतिक द्वेष से परे मान पाना  कठिन  है  और ऐसी स्थिति में परिपक्व लोकतंत्र के रूप में बांग्लादेश की प्रतिबद्धता पर फिर प्रश्नचिन्ह खड़ा होना स्वाभाविक है |