तोगडिया के बयान के मायने

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The new VHP with new terms

विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक अशोक सिंहल की म्रत्यु के उपरांत संगठन की कमान  पूरी तरह अपने हाथों में आने के बाद अयोध्या में राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण  को लेकर विश्व हिन्दू परिषद की अगली रणनीति के बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए तेज तर्रार और तीखे तेवरों के लिए मशहूर प्रवीण तोगडिया ने राम जन्मभूमि के निर्माण को लेकर किसी भी प्रकार के आन्दोलन की संभावना से इंकार कर दिया है |

अपने तर्क में भले ही तोगडिया ने कहा हो कि केंद्र में भाई की सरकार के चलते उसके विरुद्ध आन्दोलन की आवश्यकता नहीं है पर इस बयान के कहीं अधिक मायने हैं |

विश्व हिन्दू परिषद के धर्म रक्षा निधि कार्यक्रम में डा तोगड़िया ने जहां एक ओर अपने कार्यकर्ताओं को संगठन के नए युग की शुरुवात का संकेत दिया है वहीं उनके बयान में भाजपा के लिए भी कुछ संकेत छुपे हैं | इसके साथ ही राम मंदिर के मुद्दे पर जमीनी हकीकत को भी इस बयान में पहचाना गया है|

एक ही संगठन के नेता होते हुए भी अशोक सिंहल और प्रवीण तोगडिया के नजरिये में कुछ भिन्नता रही है| अशोक सिंहल विश्व हिन्दू परिषद के मुद्दों को बिना शर्त भाजपा के राजनीतिक लाभ के लिए प्रयोग होने के पक्षधर थे और उनके जीवन काल के अंतिम दिनों में मंदिर मुद्दे पर उनकी सक्रियता का संदर्भ  उत्तर प्रदेश के आगामी विधान सभा चुनावों से भी जुड़ता था पर प्रवीण तोगडिया भाजपा को बिना शर्त राजनीतिक लाभ देने के पक्षधर नहीं रहे हैं और बदले में हिन्दू एजेंडे पर कुछ ठोस प्रयास चाहते हैं और साथ ही विश्व हिन्दू परिषद को एक स्वतंत्र हिन्दू आवाज बनाये रखना चाहते हैं जो राजनीतिक दल हुए बिना भी एक हिन्दू पार्टी जैसी दिखे|

आम तौर पर माना जाता है कि प्रवीण तोगडिया के भाजपा के कुछ बड़े नेताओं से उतने मधुर सम्बन्ध नहीं है जैसे कि अशोक सिंहल के साथ थे पर ऐसा होते हुए भी वे तात्कालिक तौर पर इन नेताओं के लिए कोई बड़ी मुसीबत नहीं खडी करना चाहते पर वास्तविकता यह है कि यदि विश्व हिन्दू परिषद अयोध्या के विषय पर कोई भी आन्दोलन चलाये तो इससे भाजपा को उत्तर प्रदेश में राजनीतिक लाभ हो भी सकता है और नहीं भी पर तोगडिया ने अपने बयान से अपने कार्यकर्ताओं को नए दौर में भाजपा के साथ सम्बन्ध की नयी सीमा रेखा तय कर दी है|

तोगडिया ने अपने बयान के माध्यम से उस जमीनी हकीकत को भी अनुभव किया है जो मंदिर के विषय पर है | मामला सर्वोच्च न्यायालय में है और उसके आदेश के बिना यथा स्थिति में बदलाव संभव नहीं है और अब या तो सरकार के क़ानून से या न्यायालय के दखल से ही मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है और न्यायालय के निर्णय के सम्मान की बात आम तौर पर सभी राजनीतिक दल और मामले के पक्षधर कर रहे हैं | ऐसी स्थिति में प्रवीण तोगडिया मंदिर के विषय पर कोई आन्दोलन खडा कर पूरी तरह भाजपा के राजनीतिक लाभ के लिए काम करने वाले संगठन के बजाय विश्व हिन्दू परिषद को गैर राजनीतिक आधार पर भी एक हिन्दू पार्टी के रूप में विकसित करने की रूपरेखा पर काम करना चाहते दिख रहे हैं जहां कि भाजपा से इतर राजनीतिक दलों का  सहयोग हिन्दू एजेंडे पर विश्व हिन्दू परिषद को  मिल सके |