दादरी काण्ड फिर चर्चा में

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They killed for no reason
Akhlak who was killed on the rumor of consuming beef
Akhlak who was killed on the rumor of consuming beef

२८ सितम्बर को दिल्ली के निकट उत्तर प्रदेश की सीमा में लगने वाले ग्रेटर नोयडा के बिसाह्डा गांव ने अचानक न केवल देश के समाचारों की सुर्ख़ियों में अपना स्थान बना लिया वरन यह अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया परन्तु यह चर्चा किसी सकारात्मक कारणों से नहीं हो रही थी वरन एक दिल दहलाने वाली घटना के परिणामस्वरूप हो रही थी जब बिसाहडा गाँव के एक समुदाय विशेष के परिजनों को गाँव की एक उग्र भीड़ ने गोमांस खाने की अफवाह पर पीट पीट कर मार डाला जिसमें कि एक व्यक्ति एखलाक की मौत हो गयी और उनके पुत्र को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया जहाँ कि कुछ सप्ताह बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ |

बिसाहडा गाँव में घटी इस घटना को लेकर स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के उत्तरदायित्व पर सवाल उठे और प्रशासन के एक कदम को लेकर अधिक चर्चा हुई जब स्थानीय प्रशासन ने एखलाक परिवार के रेफ्रिजरेटर में रखे मांस की फोरेंसिक जाँच के लिए उसे लैब में भेज दिया , प्रशासन के इस कदम को अत्यंत बेतुका बताया गया और उसकी आलोचना हुई पर अब अनेक महीनों के बाद इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद दादरी काण्ड के नाम से  मशहूर हुआ बिसाहडा गाँव का काण्ड एक बार फिर चर्चा में आ गया है|

२८ सितम्बर को घटना के तत्काल बाद एखलाक के रेफ्रिजरेटर के मांस के नमूने की जांच की रिपोर्ट के आने के बाद इस पूरी घटना के राजनीतिक और अन्य परिणाम क्या हो सकते हैं ?

इस जांच रिपोर्ट में रेफ्रिजरेटर में गोमांस के स्थान पर बकरे का मांस रखे होने से यह पुष्ट हो गया है कि उस रात एखलाक के परिवार ने सामान्य तौर पर बकरे का मांस ही खाया था जो किसी भी प्रकार से गैर कानूनी नहीं है और इस जाँच से इस बात की ओर भी संकेत जाता है कि यह पूरा घटनाक्रम एक अफवाह पर आधारित था |

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को जिस प्रकार की ध्रुवीकरण की राजनीति रास आती है उसे देखते हुए इस बात की संभावना कम ही है कि राज्य सरकार इस पूरे घटनाक्रम की नयी सिरे से जांच करवाकर इस अफवाह के पीछे की ताकतों का पर्दाफ़ाश करेगी क्योंकि पूरा सच सामने लाने से अधिक राजीतिक फ़ायदा इस बात में होगा कि दोनों पक्षों में काना फूसी होती रहे और एक दूसरे का भय दिखाकर दोनों ओर राजनीतिक लाभ मिले|

एखलाक परिवार के रेफ्रिजरेटर में रखे मांस की जांच रिपोर्ट आने के बाद वर्ष २०१५ में देश में साम्प्रदायिक माहौल पर जो बहस चल रही थी और दादरी काण्ड के बाद जिसने सहिष्णुता बनाम असहिष्णुता बनाम बहस के रूप में एक अलग ही मोड़ ले लिया था उसे भी नया औजार मिल जाएगा कि भारत में कुछ वर्ग और लोग हैं जो लोगों को खाने की स्वतंत्रता भी नहीं देते और अपने आकलन और अफवाह के आधार पर उसे निशाना बनाते हैं जिसे वे पसंद नहीं करते और यह एक इसी अवधारणा है जिसने भारत की छवि को विश्व स्तर पर काफी धूमिल किया है|

जांच रिपोर्ट का आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी असर दिखेगा क्योंकि बिहार के चुनाव में हमने देखा था कि भाजपा और उसके अन्य सहयोगी संगठनों ने इस अफवाह के आधार पर ही ध्रुवीकरण का खुलेआम प्रयास किया था और अब इस रिपोर्ट के आने के बाद सवाल जवाब के फिसलन भरे रास्ते पर  फिर वही अधिक  होंगे|