दिग्विजय सिंह जब अचानक पहुंचे विहिप कार्यालय

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अप्रत्याशित यात्रा

नई दिल्ली, पिछले अनेक वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके सहयोगी संगठनों पर हमले करते आ रहे कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अचानक नई दिल्ली के आर के पुरम स्थित विहिप के केन्द्रीय कार्यालय संकटमोचन आश्रम में पहुँचकर न केवल विहिप कार्यकर्ताओं को बल्कि राजनीतिक पर्यवेक्षकों को भी चौंका दिया|

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रविवार को करीब ११ बजे कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह अचानक विहिप कार्यालय पहुंचे और कार्यालय में उपस्थित कार्यकर्ताओं के उनका स्वागत किया और दिग्विजय सिंह ने संगठन के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय के साथ मुलाक़ात की और चाय पर चर्चा भी की|

हालांकि दिग्विजय सिंह की विहिप कार्यालय यात्रा को संगठन के  पदाधिकारी सियासी मुलाक़ात मानने से  परहेज कर रहे हैं पर जिस प्रकार तथाकथित भगवा आतंकवाद या हिन्दू आतंकवाद को गढ़ने का आरोप दिग्विजय सिंह और उनके पार्टी पर लग रहा है और पिछले अनेक वर्षों से दिग्विजय सिंह हिंदूवादी कार्यकर्ताओं के निशाने पर रहे हैं उसे देखते हुए इस मुलाक़ात को महज शिष्टाचार की मुलाक़ात भर नहीं माना जा सकता |

विश्व हिन्दू परिषद के कुछ लोगों का मानना है कि विश्व हिन्दू परिषद के वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगडिया के एक सहयोगी के दिग्विजय सिंह से पुराने रिश्ते हैं और वे भी दिग्विजय सिंह के साथ विहिप कार्यालय पहुंचे थे |

विश्व हिन्दू परिषद भले ही इस मुलाक़ात को सामान्य बता रही हो पर यह असामान्य राजनीतिक परिस्थितियों में असामान्य रूप से एक दूसरे के धुर विरोधी लोगों के मध्य हुई मुलाकात है और इसके सियासी मायने तो निकाले ही जायेंगे|

असल में हमारी ओर से यह बात पहले भी कही जा चुकी है कि प्रवीण तोगडिया विश्व हिन्दू परिषद को मात्र  भाजपा के एक  अनुषांगिक संगठन के रूप में नहीं देखते  जिसका काम चुनावों में उसके लिए काम करना है बल्कि  जिस प्रकार 1980 के दशक में विश्व हिन्दू परिषद ने राम जन्म भूमि आन्दोलन के लिए तत्कालीन राजनीतिक दलों का सहयोग लिया था फिर  उसी प्रकार तोगडिया विश्व हिन्दू परिषद को हिन्दुओं के लिए कार्य करने वाले संगठन के रूप में स्थापित करना चाहते हैं और दिग्विजय सिंह की यात्रा का एक उद्देश्य उनके साथ संवाद स्थापित कर विश्व हिन्दू परिषद के नेताओं और उसके उद्देश्य के बारे में स्थिति स्पष्ट करना हो सकता है | क्योंकि अब नए संदर्भ में कांग्रेस ने भी हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद जैसे जुमले से परहेज करना आरम्भ कर दिया है |

इसी के साथ विश्व हिन्दू परिषद हिन्दू एजेंडे पर अन्य दलों का सहयोग लेकर वर्तमान केंद्र सरकार पर भी दबाव बढ़ा सकती है विशेष रूप से जब विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता माने जाने वाले भाजपा के उत्तर प्रदेश के नव नियुक्त अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने राम मंदिर को भाजपा के एजेंडे में होने से साफ इनकार कर दिया  है |