निजी क्षेत्र में आरक्षण के लिए प्रयास कर रही है केंद्र सरकार

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4 अक्टूबर, नई दिल्ली| मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार निजी क्षेत्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जातियों को आरक्षण प्रदान करने   की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रही है| प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस सम्बन्ध में एक चरण पर चर्चा हो चुकी है और सितम्बर माह में पहली बार प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र में आरक्षण के विषय पर चर्चा करते हुए इसे अमल में लाने के लिए आवश्यक पहलुओं पर विचार आरम्भ किया था और इसी क्रम को आगे बढाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से उद्योग समूहों से निजी क्षेत्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के प्रतिनिधित्व को लेकर आंकड़े की मांग की गयी है और इसके लिए 18 दिसम्बर की समय सीमा भी निर्धारित की गयी है|

मीडिया रिपोर्ट में उनके सूत्रों के हवाले से यह भी  कहा गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से फिक्की से उद्योग समूह में निजी क्षेत्रों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के प्रतिनिधित्व का आंकडा मंगाए जाने पर फिक्की ने इसे एकत्र कर पाने में अभी और समय माँगा है क्योंकि बहुत से निजी क्षेत्र इस तरह का आंकडा देने से हिचक रहे हैं , परन्तु प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से निजी क्षेत्र में आरक्षण देने के विषय को अत्यन्त गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है और अगले कुछ महीनों में इस पर कोई निर्णायक पहल हो सकती है|

निजी क्षेत्र में आरक्षण की बात पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारे में तेज हो चुकी है और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बहस को अधिक गति देते हुए समय समय पर ऐसी मांग की है और वर्तमान केंद्र सरकार में कई  मंत्री और एनडीए के अनेक सहयोगी भी ऐसी मांग उठाते आये हैं |

जबकि दूसरी और नीति आयोग ने निजी क्षेत्र में आरक्षण का समर्थन नहीं किया है और कुछ समय पूर्व अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि निजी क्षेत्र में आरक्षण की आवश्यकता नहीं है|