महाराष्ट्र के स्थानीय चुनाव में भाजपा की हार पर शिवसेना का वार

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दोस्ती में दरार

मुम्बई,  महाराष्ट्र में अत्यंत महत्वपूर्ण नगर पंचायत और जिला परिषद चुनावों में भाजपा के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद राज्य में  उसकी सहयोगी शिव सेना ने एक बार फिर अपना वार तेज कर दिया है|  शिव सेना ने स्थानीय चुनाव को भाजपा के लिए  अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए कहा है कि इस प्रदर्शन से स्पष्ट हो गया है  कि  राज्य सरकार अपने प्रशासन से लोगों को खुश कर पाने में नाकामयाब है|

शिव सेना ने राज्य में अपनी सहयोगी भाजपा पर करारा हमला बोलते हुए अपने मुखपत्र सामना में लिखा है , “ इस बात की अपेक्षा करना कि लोगों की भावनाओं को ताकत और धन से खरीदा जा सकता है  पूरी तरह गलत है| भाजपा  की पराजय से हमें दुःख हुआ है क्योंकि वे हमारे  पुराने सहयोगी हैं | हमने कभी नहीं सोचा था  कि परिवर्तन की लहर इतनी जल्दी चलनी शुरू हो जायेगी” | शिव सेना ने आरोप लगाया है कि भाजपा के मंत्रियों की आदत हो गयी है कि वे रोज एक नयी योजना की घोषणा करते  हैं जिसका असल में कोई अर्थ नहीं होता|

जिस कांग्रेस के पास राज्य में कोई नेता नहीं है और जिस एन सी पी पर भ्रष्टाचार के इतने आरोप हैं उन्हें इन चुनावों में शानदार सफलता कैसे मिल गयी |

शिव सेना के मुखपत्र में आगे लिखा गया है , “ इन चुनावों के बाद भाजपा की ओर  से स्पष्टीकरण आयेगा कि ये परिणाम राज्य की जनता की भावनाओं को व्यक्त नहीं करते पर इस प्रकार छुपने से कोई लाभ नहीं है | जब से भाजपा की सरकार  केंद्र में आयी है ऐसी अपेक्षा थी कि ग्राम पंचायत से लोकसभा तक देश की जनता  भाजपा के साथ है”| शिव सेना ने भाजपा पर चुटकी लेते हुए लिखा है हवा अब ठंडी पड़ गयी है और जैसे जैसे समय बीत रहा है तेज हवाएं धीमी पड़ रही हैं और साथ साथ गर्द का गुबार भी छंट  रहा है|

शिव सेना ने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा है कि “ अगर भाजपा को अपना अस्तित्व बचाए रखना है तो इसे यह स्वीकार करना चाहिए कि शासन का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है और लूट मची हुई है”

हाल में सम्पन्न हुए छः नगर पंचायत चुनावों में शिव सेना ने 20 सीटें जीती हैं जबकि एन सी पी  ने 20 और कांग्रेस ने 21 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया है वहीं भाजपा को मात्र 5 सीटों पर संतोष करना पडा | जनवरी में 345 नगर पंचायत सीटों के चुनाव के बाद दूसरे चरण के लिए 102 पंचायत सीटों के लिए चुनाव हुए थे|

विधान सभा चुनाव से पहले भाजपा और शिव सेना के गठबंधन टूटने और फिर चुनाव बाद मजबूरी में साथ आने के बाद से ही  दोनों दल राज्य में और केंद्र में भले ही साथ सरकार चला रहे हैं पर अब पहले वाली मधुरता संबंधों में नहीं देखी जा रही है|

शिव सेना बी एम सी में अपनी सत्ता  बचाने के लिए भाजपा में सरकार की सहयोगी है और इस बात की पूरी संभावना है कि 2017  बी एम सी चुनावों से पहले  शिव सेना भाजपा का साथ छोड़कर अकेले यह चुनाव लडेगी क्योंकि पिछले कुछ महीनों में अनेक स्थानीय  निकाय के चुनावों में शिव सेना को अच्छी सफलता मिली है | महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण आने वाले दिनों में पूरी तरह बदल सकते हैं |