मोदी के भाषण के मायने

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2017 में 2019 का सन्देश

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी विजय के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने केन्द्रीय कार्यालय पर विजय जुलूस के साथ कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के लिए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित किया था और इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक भाषण भी दिया जिसमें कुछ बिंदु उन्होंने उठाये | इस भाषण के आधार पर इसके कुछ राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा सकते हैं|

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी ने 2019 के आम चुनावों के लिए अभी से अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को न्यू इंडिया का नारा देकर भविष्य के एजेंडे के आधार पर जनता का समर्थन हासिल करने के लिए तैयार करना आरम्भ कर दिया है ताकि बीते लगभग तीन वर्षों के कार्यकाल की समीक्षा के स्थान पर 2017 के चुनाव परिणामों के बाद नए सिरे से इस सरकार के कार्यकाल की समीक्षा कार्यकर्ता स्वयं भी करें और लोगों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करें|
  • प्रधानमंत्री ने विनम्रता , सेवा और सबको साथ लेकर चलने का सन्देश दिया जिसके भी राजनीतिक निहितार्थ हैं| उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी विजय के बाद भी जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव में अब भी एन डी ए अपने अकेले दम पर अपने प्रत्याशी को जिताने की स्थिति में नहीं है और शिव सेना के तीखे तेवर और दूसरी ओर उड़ीसा में पंचायत चुनावों में भाजपा की प्रभावशाली विजय के बाद बीजू जनता दल के भी खुलकर विपक्ष के खेमे में जाने की संभावना के बाद राष्ट्रपति पद का चुनाव अत्यंत रोचक हो जाता है क्योंकि इस चुनाव में विपक्ष यदि संयुक्त रूप से कोई प्रयास कर पाया तो यह 2019 आम चुनावों की भूमिका भी रखेगा , ऐसे में प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत के बाद भी प्रखर हिंदूवादी मुद्दों पर अधिक मुखर होने से परहेज करना चाहेंगे ताकि कुछ छोटे दलों के समर्थन का मार्ग खुला रहे और अगले आम चुनावों से पहले  आर्थिक एजेंडे और विकास की रेल पटरी से उतर कर कोई दूसरी बहस देश में न चला पाए |
  • विदेश नीति के मामले में ऐसा माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के चलते पाकिस्तान के साथ संबंधों में ठहराव आ गया था और अब नयी परिस्थितियों में इस स्तर पर भी कुछ चहल पहल देखने को मिल सकती है|

राजनीति का अपना चरित्र और सीमाएं होती हैं और हर राजनीति व्यावहारिक सीमा में बंधी होती है और जो इसके पूरी तरह सिद्धांतवादी और नैतिक होने की अपेक्षा करते हैं वे अक्सर दुखी रहते हैं| | इसका उदाहरण है कि जब प्रधानमंत्री जी अपने संबोधन में कह रहे थे कि वे सरकार के बनने न बनने के दायरे में सोचने वाले व्यक्ति नहीं हैं तो उसी समय गोवा और मणिपुर में भाजपा ने आनन फानन में राज्य में दूसरे नम्बर की पार्टी होकर भी सरकार का दावा पेश कर दिया और कांग्रेस को सबसे बड़ी पार्टी होने पर भी उसे कोई मौक़ा नहीं मिलने दिया |