रजनीकांत पर टिप्पणी विजयकांत को पड़ी भारी

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हम साथ साथ नहीं हैं

तमिलनाडु की राजनीति में तमिल फिल्म स्टार की अपनी ही भूमिका होती है और उनमें से अनेक सीधे सीधे राजनीति करते हैं और कुछ राजनीति में नहीं होते हुए भी  अपने फैन क्लब से राजनीति को प्रभावित करते हैं|  ऐसा ही तमिलनाडु के इस बार के चुनाव में हो रहा है| एक ओर  तमिल स्टार और कैप्टेन के नाम से मशहूर विजयकांत ने अपनी डी एम् डी के पार्टी के साथ एक  तीसरे विकल्प के रूप में राज्य के चुनावों के अपना दवा ठोंक रखा है तो वहीं मेगा स्टार रजनीकांत राजनीति में न होते हुए भी अपनी फैन  फालोविंग से राज्य की  राजनीति में चर्चा में हैं|

हाल ही में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए विजयकांत ने रजनीकांत पर एक टिप्पणी कर दी जो उन पर भारी  पड़ती दिख रही है उन्होंने अपनी सभा में कहा था कि  , “ विजयकांत किसी से नहीं डरता , मैं रजनीकांत की तरह डरपोक नहीं हूँ”

असल में विजयकांत ने उस घटना का हवाला दिया था जब राज्य की ही एक और पार्टी पी  एमके ने 2002 की रजनीकांत की फिल्म बाबा में रजनीकांत पर सिगरेट पीने की आदत को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था और इस आरोप के बाद रजनीकांत ने फिल्मों में सिगरेट पीना छोड़ने का निर्णय ले लिया था |
रजनीकांत पर विजयकांत की यह टिप्पणी रजनीकांत के समर्थकों को नागवार गुज़री और राज्य के सबसे अधिक जनसंख्या वाले चौथे शहर त्रिचुनापल्ली में नाराज रजनीकांत समर्थकों ने एक स्वर में बड़े पैमाने पर 16 मई के राज्य के चुनावों में डी एम के के प्रत्याशी को समर्थन देने का निर्णय किया है|

त्रिची फैन एसोसियेशन ने विजयकांत की इस टिप्पणी के बाद घोषणा की है कि रजनीकांत ने कभी राज्य की राजनीति में दखल नहीं दिया और वे पूरी तरह गैर राजनीतिक हैं पर विजयकांत ने उन्हें डरपोक कहकर उनकी आलोचना की है और अब राजनीकांत समर्थक राज्य में 1996 के चुनावों की तरह बड़ा परिवर्तन लाकर रहेंगे|

1996 में रजनीकांत ने तमिलनाडु के चुनावों से पहले कहा था , “ यदि जयललिता सत्ता में वापस आयीं तो तमिलनाडु को भगवान भी नहीं बचा पायेगा” और इसी कथन के बाद डी एम के गठबंधन को राज्य में भारी सफलता मिली थी और जयललिता को भारी पराजय का सामना करना पडा था |

2004 के चुनावों में रजनीकांत ने ए आई ए डी एम के और भाजपा गठबन्धन का समर्थन किया था पर उसके बाद से वे गैर राजनीतिक ही रहते हैं पर मतदाताओं पर उनका प्रभाव काफी अधिक है|
पिछले लोकसभा चुनाव में चेन्नई की अपनी यात्रा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने भी रजनीकांत से मुलाक़ात की थी जिसे सुपर स्टार ने शिष्टाचार भेंट बताया था |

विजयाकांत के विरुद्ध रजनीकांत समर्थकों की यह बगावत काफी मायने रखती है क्योंकि उनकी पार्टी में डी एम के साथ गठबंधन न करने के सवाल पर पहले ही मतभेद हैं और डी एम डी के को मिलने वाले वोटों का सीधा फायदा जयललिता को हो रहा है और करूणानिधि गठबंधन को नुकसान| अब परोक्ष रूप से रजनीकांत के इस चुनाव में शामिल हो जाने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है|