संतों की शरण में मुम्बई कांग्रेस

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2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद से प्रमुख विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस को मिलती लगातार पराजय ने कांग्रेस को कुछ नया सोचने को मजबूर कर दिया है और इसी क्रम में कांग्रेस अल्पसंख्यक समर्थक और हिन्दू विरोधी होने की अपनी छवि से बाहर आने के लिए हिन्दू संतों की शरण में जा रही है| इस प्रयास का आरम्भ कांग्रेस की ओर से मुम्बई से किया जा रहा है |

मुम्बई मिरर की एक रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस की मुम्बई शाखा ने पार्टी के भीतर मुम्बई साधू संत कांग्रेस के नाम से साधू संतों का एक आयाम स्थापित करने का फैसला किया है| वकोला हनुमान मंदिर के प्रमुख पुजारी ओम दासजी महाराज इस आयाम के प्रमुख होंगे और इसका पहला सम्मेलन आगामी रविवार को वकोला मंदिर में आयोजित होगा| इस सम्मलेन में शहर के विभिन्न मंदिरों के 200 से अधिक संत भाग लेंगे | इस कार्यक्रम में मुम्बई कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व सांसद  संजय निरूपम संतों का सम्मान करेंगे और उनके चरण धोकर उन्हें दक्षिणा भी देंगे |

संजय निरूपम के अनुसार उन्हें इस कार्यक्रम की अनुमति पार्टी हाई कमान से मिली है और उन्होंने कांग्रेस के महासचिव मोहन प्रकाश से इसकी चर्चा कर ली है|

संजय निरूपम के अनुसार जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता मंदिरों और धर्म स्थलों का उपयोग नफरत फैलाने और कांग्रेस के विरुद्ध दुषप्रचार में कर रहे हैं उसका प्रतिवाद करने की आवश्यकता है|

कांग्रेस का यह प्रयास काफी राजनीतिक मायने रखता है क्योंकि लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की हार की समीक्षा में पार्टी की हिन्दू विरोधी पहचान को एक बड़ा कारण माना गया था और हाल के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी की हार का कारण समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को बताया गया था जिसकी उत्तर प्रदेश में पहचान अल्पसंख्यक परस्त की थी | ऐसे में कांग्रेस का हिन्दू धर्म को महत्व देना उसके पुराने दिनों की याद दिलाता है जब आर्य समाज और सनातनी हिन्दू कांग्रेस की मूल प्रेरणा हुआ करते थे |