राष्ट्रपति चुनाव नतीजों में भविष्य के संकेत

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अब आगे की चुनौती

राष्ट्रपति चुनावों के नतीजों के आधार पर आज की राजनीति और 2019 के आम चुनावों की स्थिति का आकलन किया जा सकता है|

  • कांग्रेस की ओर से विपक्ष का उम्मीदवार वैसे तो आम तौर पर विपक्षी गठबंधन का उम्मीदवार था , पर इसमें कांग्रेस और वामपंथी   विचारधारा के लोग ही  प्रमुख तौर पर थे  क्योंकि तृणमूल कांग्रेस और एन सी पी भी तो एक प्रकार से कांग्रेस विचारधारा  के ही अंग हैं|

 

  • सत्ताधारी एन डी ए को करीब 15 प्रतिशत मत क्षेत्रीय दलों का मिला है जो उसे विपक्षी उम्मीदवार से कांटे की टक्कर से बचा ले गया |

 

 

  • कांग्रेस अपनी अगुवाई में विपक्ष के मोर्चे की ताकत का अंदाजा लगाना चाहती थी | अब भी उसके पास देश में चुने हुए प्रतिनिधियों का एक तिहाई समर्थन है जिस पूंजी के आधार पर कांग्रेस देश में आने वाले दिनों में वैचारिक आधार पर मुद्दे खड़ाकर तमाम क्षेत्रीय दलों को अपनी भूमिका तय करने को विवश करेगी , क्योंकि कांग्रेस को पता है कि बहुत से क्षेत्रीय दलों से केवल केंद्र सरकार के साथ अपने रिश्ते बेहतर बनाये रखने के लिए उनके राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को समर्थन दिया है न कि विचारधारा की प्रर्तिबद्धता के और भाजपा का देश की राजनीति को एकध्रुवीय करने के प्रयास में उसकी सक्रियता ने अनेक क्षेत्रीय दलों में असुरक्षा की भावना पैदा की है और आने वाले दिनों में अनेक क्षेत्रीय दलों में भी उठापटक होने की संभावना और अनेक राजनीतिक समीकरण बदलने बिगड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता |

 

  • सत्ताधारी दल के सामने अब असली चुनौती अपनी विचारधारा के मुद्दों को सहेजते हुए अपना विस्तार कर मध्यमार्गी दिखने की है| इस विरोधाभास में संतुलन , अपने अति उत्साही समर्थकों को रोक पाना जिन्हें लगता है कि देश के सभी संवैधानिक पद उनकी जद में हैं और देश में नयी व्यवस्था की शुरुआत हो गयी है, यह भी सत्ताधारी दल की चुनौती होगी |

 

 

  • अब केंद्र की सत्ताधारी पार्टी पर अनेक विवादित मुद्दों पर स्पष्ट राय रखने और कुछ निर्णायक करने का दबाव बढेगा जो देश में विचारधारा के विभाजन को और तीखा करेंगे |

 

  • केंद्र के सत्तासीन सरकार के अति उत्साहित समर्थक हिंदुत्व के मुद्दों पर और मुखर होंगे जिसका सीधा असर सोशल मीडिया से समाज तक दिखेगा और भारत में और भारत से बाहर मीडिया बारीक निगाह से केंद्र सरकार का आकलन करेगा|

 

  • राष्ट्रपति चुनावों के परिणाम के आधार पर यह कहा जा सकता है कि आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों से २०१९ के  आम चुनावों तक अब देश में चुनाव का माहौल ही रहने वाला है|