सोनिया गांधी ने क्यों कहा हम लड़ेंगे?

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Meira kuamr files nomination for presidential Election 2017.

नई दिल्ली, 16 विपक्षी दलों की संयुक्त उम्मीदवार श्रीमती मीरा कुमार ने आगामी राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपना नामांकन भर दिया और नामांकन भरे जाने के समय कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह भी श्रीमती कुमार के साथ उपस्थित रहे|

आम तौर पर मीडिया के सामने कम आने वाली श्रीमती सोनिया गांधी जो कि लम्बे समय तक अस्वस्थ रहने के कारण सार्वजनिक  रूप से सामने नहीं आ रही थीं उन्होंने इस अवसर पर मीडिया को निराश नहीं किया और अत्यंत संक्षेप में अपनी प्रतिक्रिया से कहीं अधिक अपना संकल्प व्यक्त किया कि राष्ट्रपति चुनाव एक विचारधारा , सिद्धांत और सच्चाई की लड़ाई है जिसे हम लड़ेंगे|

श्रीमती सोनिया गांधी का यह संकल्प उन दावों और आकलनों के पूरी तरह विपरीत है जिसमें कि आम तौर पर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष एक हारी हुई लड़ाई लड़ रहा है और यह लडाई सांकेतिक से अधिक और कुछ नहीं है|

श्रीमती मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद के अपने उम्मीदवार के रूप में घोषित करने के पीछे कांग्रेस अध्यक्ष ने भविष्य की राजनीति के लिए अनेक संकेत दे दिए हैं|

राष्ट्रपति चुनाव की विपक्ष की पूरी रणनीति में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अनुपस्थिति इस बात का संकेत है कि अभी अगले दो वर्षों तक विपक्ष को एकजुट रखने में सोनिया गांधी ही धुरी के रूप में काम करने वाली हैं|

श्रीमती सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति चुनाव को विचारधारा की लड़ाई बताकर संकेत दे दिया है कि अगले दो वर्षों में देश में राजनीतिक विमर्श केवल सत्ता और विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई न होकर दक्षिण बनाम वाम व मध्यमार्ग विचार की लडाई रहने वाली है |

इसके साथ ही कांग्रेस सहित समस्त विपक्ष को यह आभास हो चुका है कि कांशीराम के बहुजन समाज पार्टी के द्वारा आरम्भ किया दलित आन्दोलन जिसने कि उत्तर भारतीय राज्यों में कांग्रेस के खाते से दलित वोट खींच लिया था इस समय चेहरा विहीन हो गया है क्योंकि प्रमुख दलित चेहरा मायावती अब अपनी आभा खो चुकी हैं  और इसका लाभ उठाकर नरेन्द्र मोदी ने दलित आन्दोलन के साथ अपना चेहरा जोड़कर उसे अपने साथ कर लिया है जो कि उत्तर प्रदेश में उनकी जीत का बड़ा कारण बनता जा रहा है, अब कांग्रेस ने बाबू जगजीवन राम की पुत्री श्रीमती मीरा कुमार को नया चेहरा बनाकर दलित आन्दोलन को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि कांग्रेस उनके साथ है क्योंकि डा भीमराव आंबेडकर की बाद देश में दलितों को मुख्यधारा में लाकर उन्हें राजनीतिक रूप से सशक्त करने के प्रयास में जगजीवन राम का ही नाम लिया जा सकता है | आने वाले दिनों में भाजपा के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती बनने वाली है|

दलित . अल्पसंख्यक , आदिवासी को अपने साथ लाने के प्रयास के साथ ही  भाजपा में जातिवादी अन्तरविरोध पैदा कर हिंदुत्व की एकजुता को चुनौती देने की कांग्रेस की नीति स्पष्ट है और शायद यही कारण है कि श्रीमती मीरा कुमार के नामांकन में पूरे संकल्प के साथ सोनिया गांधी ने पत्रकारों से कहा कि “ हम लड़ेंगे” |